Dr K K VERMA

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full name: Dr. Krishna kanhaiya verma qulifications: MA(hindi), B.ed., Phd(hindi), NET(june-2012, december-2012) publications- Do Gazlen(durvadal magazine)

बुधवार, 9 अक्टूबर 2024

अमेरिका

 

 🌹🌹 अमेरिका 🌹🌹


अमेरिका,


जी हां अमेरिका। 


वही अमेरिका जिसकी 


दुनिया पर हुकूमत है, 


जिसके एक इशारे पर 


दुनिया का उठता गिरता 


बाजार व जनमत है। 


जी हां, वही अमेरिका 


जो आज सुप्रीम पावर है, 


जो महाबलशाली है,


जिसकी जुबान साफ 


पर करतूत काली है।




आइए, आज हम


उसी अमेरिका पर बात करते हैं,


जिस पर कुछ लिखने के पहले 


बड़े-बड़े कलमकार भी


डरते हैं।




"अमेरिकियों की सुरक्षा के लिए


हम कुछ भी करेंगे 


किसी भी हद तक जाएंगे," 


अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर


ये बचकाने बयान हैं,।


आप वैश्विक महाशक्ति हैं,


आपके कंधों पर जिम्मेदारियां भी


वैश्विक हैं,


सच तो यह है कि 


आज भूमण्डलीकरण के दौर में,


सिर्फ अपने लोगों की बात करना


आत्मघात है,


प्राणी मात्र से जुड़ाव 


और सब की भलाई की कामना ही


वैश्वीकरण का जीव द्रव्य है।




अमेरिका, 


आज बेशक समर्थ है, 


किंतु उसकी गोद में 


पलता अनर्थ है।


निरस्त्रीकरण की बात करता, 


पर बेंचता हथियार है,


आतंक को कोसता 


पर आतंकियों का यार है।


उठाकर गिराना ही 


जैसे उसका काम हो ,


फिर वह चाहे लादेन हो 


या कि सद्दाम हो।




कभी गोरों के गुलाम ने 


आज पूरी दुनिया को 


गुलाम बना रखा है,


खुद को वर्ल्ड ऑर्डर का 


मुकाम बना रखा है। 


सभी तरफ उसकी ही 


गूंजती तूती है,


बाकी दुनिया 


अमेरिका के पैरों की जूती है।




जिंदा रहने का 


सारा अरमान बेंचता है, 


जी हां, अमेरिका दुनिया में 


मौत का सामान बेंचता है।




अमेरिका आंखों वाला अंधा है, 


उसका जो पूंजीवादी धंधा है 


वह निहायत गंदा है।




बांटता अंधेरा 


उजाले की चाह रखता है 


कृत्रिम गोरे लिबास में 


चेहरा स्याह रखता है।




अपने वर्चस्व की चिंता उसे 


इंसानियत से ज्यादा है,


वह खुद को राजा समझता 


बाकी सब को प्यादा है।




मुल्कों पर सभी अपना


स्वत्व चाहता है,


पीता गरल है नादां 


अमरत्व चाहता है।




बदनियती बस 


महाबली सोवियत संघ को 


तोड़ दिया,


धोखे से हमला कर 


ईराक,अफगान को तड़पता छोड़ दिया।


क्या मिला तुम्हें लहूलुहान करके 


वियतनाम ?


कुछ लाशें तो याद हैं, 


कुछ हो गईं गुमनाम।




धिक्कार तुम्हें है,


तुम्हारी शक्ति नपुंसक है,


गर धरती पर कोई रोता है, 


तुम्हें डूब मरना चाहिए 


यदि कोई भूखा सोता है।




ब्रह्मांड के उस पार तक 


देखने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति को


दीवार व टेन्ट द्वारा 


छिपाई गई गंदगी व गरीबी का 


ना दिखाई देने का परिणाम


अमेरिका को भुगतना पड़ा 


ट्रंप की असंवेदनशीलता से असंतुष्ट


अमेरिकियों का वाइट हाउस पर धावा 


राष्ट्रपति का शेल्टर हाउस में छिपना 


अमेरिकी राजनीतिक क्षितिज पर


अमिट स्याह धब्बा है, 


दुनिया में 


बबूल का विष वपन करके 


आम की प्राप्त नहीं हो सकती,


बांटने वाले को 


थोड़ा ही सही 


मेहंदी का रंग लगता जरूर है।




किसे नहीं मालूम?


हाउडी-मोदी व


नमस्ते ट्रंप कार्यक्रमों में 


पैसों का अपव्यय,


जिससे हुआ 


वैश्विक राजनीति का क्षय।




बुद्धिजीवी अमेरिकियों को था सब ज्ञात


छीन ली ट्रम्प की कुर्सी,


उपस्थित हो गया था 


तानाशाही का भय।




बाइडेन की हुई ताजपोशी,


देखने लायक थी 


ट्रंप की खामोशी।




बाइडेन से दुनिया को थी उम्मीद,


बेतहाशा,


किंतु लगी हाथ


निराशा।




वे नहीं रोक सके 


रूस-यूक्रेन युद्ध 


जिसे देख ट्रंप होते रहे क्रुद्ध।




इससे भी बढ़कर


आज दुनिया में नित्य खुल रहे


नये-नये वार फ्रन्ट


विश्व विनाश की आहट है।


कभी रुस और कभी चीन के पीछे भागना


अमेरिका की बीतती बादशाहत की 


अकुलाहट है।






जिस पर बाइडेन का 


हथियारों का व्यापार,


दुनिया को ला पहुंचाया 


तीसरे विश्वयुद्ध की कगार।




मौन अमेरिका देख रहा 


असफल राष्ट्रपतियों का दौर


लगातार,


अगले चुनाव में निश्चित है


बाइडेन की हार।




अमेरिका


ऊंचे दामों में दुनिया में बुद्धि खरीदता है


कुछ वरेण्य, 


तो कुछ दुर्बुद्धि खरीदता है।




बुद्धि वादी अमेरिका का 


हृदय पक्ष रिक्त है,


इसलिए बुद्धि के आविष्कारों का


अनुभव अब तक तिक्त है।




विज्ञान बुद्धि का मूर्त संस्करण है, 


हृदय उसका 


सास्वत, व्यवस्थित व्याकरण है।




अमेरिका


अपने वैज्ञानिक उन्नयन हेतु


दुनिया में चुन चुन कर बुद्धि खरीदता है,


किंतु उसका हृदय पक्ष


रीता है।


इसलिए उसकी 


अन्याय,अपराध और आतंक 


की व्याख्या अवसरवादी है,


तभी दुनिया के सम्मुख आज


उसका चेहरा 


फसादी है।




यद्यपि बुद्धि तीव्र अन्वेषी है 


फिर भी वैज्ञानिक प्रगति 


कहां समावेशी है ?




कारण इसका हृदय से 


बुद्धि का अलगाव है,


 बुद्धिवादी दौर का 


खुद से ही दुराव है।




हृदय बुद्धि का सम्मिलन ही 


सृजन का आधार है,


इनके एकाकीपन में 


विध्वंश, विनाश, हाहाकार है।




बुद्धि-बदौलत 


सुपर पावर बनने वाले 


अमेरिका की बादशाहत 


बस कुछ ही दिन शेष है,


अगर उसने साधा नहीं ह्रदय पक्ष।




अमेरिका की अदूरदर्शी नीतियों ने


संयुक्त राष्ट्र तक को 


अशक्त कर दिया ,


और धार्मिक कट्टर पंथ को 


सशक्त कर दिया।


यह कट्टरता 


मानवता के लिए अभिशाप है,


अशिक्षा जिसकी जननी,


अंधविश्वास जिसका बाप है।




इसने आज अपने आगोश में 


ले रखी धरती पूरी है,


धार्मिक कट्टरता का समाधान


ससमय जरूरी है।




आतंकी संगठनों के हाथों में,


परमाणु बमों का पहुंचना


अमेरिका की सुप्रीमेसी की 


सबसे बड़ी हार है,


आज आतंकी संगठनों के हाथों में


कई परमाणु शक्ति संपन्न 


देशों की सरकार है।




अमेरिका को यह नहीं दिखता ?


तो साफ कहूंगा 


वह दिवान्ध है,


जो अपनी अतिशय संपन्नता में,


मदांध है।


आ तुझे दिखलाता हूं 


वह मंजर


जिससे दुनिया बनने वाली है


बंजर।


गर एक भी देश ने 


दबाया परमाणु बटन,


तो पूरी धरती


हो जाएगी श्मशान,


तत्क्षन।


अमेरिका को अपना 


सुप

र पावर रूप दिखाना होगा,


बुद्ध और हृदय के मध्य 


सामंजस्य बिठाना होगा।




अन्यथा की स्थिति में 


वर्ल्ड ऑर्डर का बदलना निश्चित है,


परिणाम स्वरूप विखंडित होकर


अमेरिका का मृतप्राय होना


सुनिश्चित है।


क्योंकि---व्यष्टिवादी सोच से


समष्टिवादी अलंकरण की प्राप्ति


असंभव है,


पर-पथ कांटे बोने वालों का,


जीवन पथ निष्कंटक होना


कहां संभव है ?


अमेरिका ने जब-जब भी 


किया है गलत का समर्थन 


तो उसे उसका खामियाजा 


पड़ा है भुगतना 


और होना पड़ा है शर्मसार 


दुनिया में हर बार।


🌹🌹वर्मा बस्तवी🌹🌹


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