🌹🌹जाति तुझे है बनाया किसने ?🌹🌹
जाति तुझे है बनाया किसने?
जाति रहित मेरा दिल है।
जातिवादियों तुमसे है कहना,
ये न समाज के काबिल है।।
जाति तुझे है बनाया किसने------------?
दोष छुपे है जाति में इतने,
जितने हैं नभ में तारे।
जाति ने हैं कितने घर फूंके,
जाति ने हैं कितने मारे?
जाति तुझे है बनाया किसने------------?
जाति तुम्हें तो भाती होगी,
जाति का कब देखा सपना?
आंख खुली तो बर्बादी थी,
जाति भी हो न सकी अपना।
जातिवाद हम खत्म करेंगे,
मिलकर आओ साथ चलें।
अपनी-अपनी जाति भुलाकर,
हाथ में लेकर हाथ चलें।
जाति तुझे है बनाया किसने-----------?
बात से जी भरता ही नहीं,
अब साथ मिले तो बात बने।
जहर जाति का तुममें जब तक,
कैसे ये मुलाकात बने ?
एक बनें तो कैसे बनें हम ?
जाति के इस जिन्दा रहते,
जाति खत्म क्या हो पाएगी ?
जातिवादियों के रहते।
जाति तुझे है बनाया किसने------------?
🌹🌹 वर्मा बस्तवी 🌹🌹

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें