Dr K K VERMA

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basti, uttar pradesh, India
full name: Dr. Krishna kanhaiya verma qulifications: MA(hindi), B.ed., Phd(hindi), NET(june-2012, december-2012) publications- Do Gazlen(durvadal magazine)

मंगलवार, 25 जून 2013

मधुकरानिलकली

मधुकरानिलकली

गहन, नीरव वन बीच
जहाँ
अतिशीतलता, अनिल बिहीन।
नूतन किसलय मध्य
एक नवोढ़ा कली
यौवन-मद-मस्त
कर रही श्रृंगार,
डाले कंठ
सुमनों का हार।
छा गए अचानक
नभ मेघों के पुंज,
और सुहाया मौसम
निकला एक मधुकर कुंज।
वह गा रहा था
कोई गाना
जो था
बिरह का,
फिर वह
लगाता चक्कर पहुंचा
जहाँ बैठे थे हम,
फिर जाने क्यूँ
लगा सिर के
दो फेरे
बढ़ा कुछ आगे,
अनजाने ही में
जा पहुंचा फिर
उसी कली के आगे।
मिल गए नेत्र
दोनों के
अचानक कली
लज्जित सी मुस्कुरायी
फिर हँस पड़े दोनों
फिर निष्ठुर मधुप
जा समीप
चूम लिए
सुन्दर कपोल लाल
हो गयी कली क्रुद्ध
उसके इस
बेशर्मी कारनामे से
देख कली को नाराज़
मधुप गया ठिठक कुछ।
फिर कली ने देख मधुकर को
भयभीत
कर ओट
घूंघट-पत्तों के
लगी खिलखिलाकर हंसने,
पुनः हँसते देख कली को
उसके काननचारी दृगों को
दुष्ट कामान्ध मधुप
ना सका संभाल
खुद को।
जा समीप कली के
लगा गुनगुनाने
और जानकर उसकी गुप्त अनुमति
देख उसके
कामोत्तेजना से गुदगुदाते
उरोजों को
असहाय-सा हो
गिर पड़ा उसके आँचल में।
तब कली ने
दे दी अनुमति उसे प्रत्यक्ष
केलि करने की
फिर दोनों लिपट कर आपस में
लगे काम-क्रीड़ा करने
इस बीच
मेघ-झरोखे से प्रभाकर
देखकर यह
युगल प्रेम
गया छिप पुनः।
खिल गयी कली फिर
प्रिय मधुप के स्पर्श से
हो गए शिथिल दोनों के तन
आपसी संस्पर्श से
तभी अचानक
आ पहुंचा वहां
मंथर-मंथर अनिल।
देख दोनों की करामात
जल उठा वह क्रोध से
पूंछा कली से
है कौन यह?
जो मेरी जगह तुमसे.......?
मेरा प्रिय।
कली ने उत्तर दिया।
झुंझलाकर बोला अनिल
मैं हूँ तेरा प्रिय
ना कि मधुप
सामान्य जनों को
कौन कहे
कहते हैं ऐसा ही कवि भी।
सुन कड़ककर  बोला मधुप
अनिल तू है
नादान अभी,
यदि कविजन ऐसा कहते हैं
तो कहते हैं गलत सभी।
इसका रस मैं लेता
अंकों में इसके
मैं सोता।
मैं हूँ इसका
सच्चा प्रिय
हमें देख फिर क्यों तू जलता
अपमानित अनिल
लगा अंधड़-सा चलने,
निज प्रिय मधुकर के
रक्षार्थ,
कली ने अपने सुन्दर पत्रांकों में
उसे
कर लिया बंद।
थक गया अनिल/हो गया शांत
देखा दोनों फिर स्वच्छंद
खुल गया
उसका पोल
हंस पड़े हम
कहने लगा अनिल
कर दो क्षमा
प्रिय मधुप/मधुकर
प्रिया सुमन/कली।

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