1. त्रेता के सुषेन,
कलयुग के
झोला छाप।
2. आज गाँधी भी बहुत हैं,
स्वतंत्रता की लड़ाइयाँ भी बहुत हैं
पर उनमें अजेय अहिंसा नहीं है।
3. अब भगवान् को जब
अपने भक्तों की परीक्षा लेनी होगी
तो वह नक़ल होने देगा या अध्यादेश लागू करेगा।
4. यदि आपकी कोई जाति नहीं,
तो देश की राजनीति में
आपका कोई भाग नहीं।
5. दिनकर की दुनिया
विचित्र नवीन
हमारी अर्थहीन, उदासीन, दिशाहीन।
6. दुःख की जड़ों को पहले संयोंजते हैं
फिर खोजते उनमें कभी
फल-फूल-सुख की पंक्तियाँ।
7. प्रेम की फुलवारी में
ऐसा हो माली
जो ना तोड़े फूल, न काटे डाली।
8. पहले जब दुःखी होता था
तब ईश्वर का नाम लेता था
अब जब ईश्वर का नाम लेता हूँ, दुःखी हो जाता हूँ।
9. परमाणु अस्त्रों का बढ़ता प्रसार
तृतीय विश्वयुद्ध का
सुदृढ़ आधार।
10. आज के राजनेता
भ्रष्टाचार के
प्रणेता।
6. दुःख की जड़ों को पहले संयोंजते हैं
फिर खोजते उनमें कभी
फल-फूल-सुख की पंक्तियाँ।
7. प्रेम की फुलवारी में
ऐसा हो माली
जो ना तोड़े फूल, न काटे डाली।
8. पहले जब दुःखी होता था
तब ईश्वर का नाम लेता था
अब जब ईश्वर का नाम लेता हूँ, दुःखी हो जाता हूँ।
9. परमाणु अस्त्रों का बढ़ता प्रसार
तृतीय विश्वयुद्ध का
सुदृढ़ आधार।
10. आज के राजनेता
भ्रष्टाचार के
प्रणेता।

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