दुनिया के सवालात का यारों जवाब हूँ,
अब तक के लेन-देन का सारा हिसाब हूँ।
पढ़ते जिसे छुपा के मैं वो किताब हूँ,
हसीनों का नहीं यारों खुदा का ख्वाब हूँ।
सारे जहाँ से कह दो मेरा ख्याल वो रक्खें,
नहीं दुनिया को मिटा दूंगा में वो जनाब हूँ।
चलना है सबको मेरे नक़्श-ए -कदम पे,
डरना नहीं मैं सबसे हाज़िर जवाब हूँ।
मुझसे जुदा होकर कहीं ऐतबार मत करना,
पीता जो नहीं बचता मैं वो शराब हूँ।
कुछ तो मेरी मजबूरियां कुछ मेरे वसूल,
इसीलिए दुनिया को मैं दिखता ख़राब हूँ।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें